* भारत में तम्बाकू 3.6 करोड़ लोगों को रोजगार देता है जिसमें 60 लाख किसान शामिल हैं। कृषि प्रसंस्करण व्यापार निर्यात सहित 4.5 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका इससे जुड़ी है।
* भारत दुनिया में अनिर्मित तंबाकू के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है।
* जीएसटी 2.0 में सरकार किसानों से कच्चा तंबाकू खरीदती है और उसे साफ करके (पत्तियां-लकड़ी-धूल अलग करके) ग्रेडिंग (अलग-अलग साइज) करती है। ऐसे व्यापारियों पर जीएसटी 28% से बढ़ाकर 40% कर दिया गया है और अतिरिक्त 18% उत्पाद शुल्क लगाया गया है।
* जो व्यापारी किसान का कच्चा तम्बाकू लेकर उसे ही बाजार में बेचने योग्य बनाते हैं और यदि सरकार द्वारा उन पर टैक्स का बोझ डाला जाएगा तो व्यापारियों पर आर्थिक टैक्स का बोझ ज्यादा हो जाएगा और वे किसानों को अच्छा वाजिब दाम नहीं दे पाएंगे। इसका सीधा असर किसान और उसके परिवार की आय पर पड़ता है।
* * यह सरकार के दोहरे रवैये को भी दर्शाता है जैसे कि तैयार बीड़ी पर 18% जीएसटी है लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाले कच्चे तंबाकू पर 40% जीएसटी और 18% उत्पाद शुल्क है। इससे वे व्यापारी भी असमंजस में हैं जो किसानों से कच्चा तंबाकू खरीदकर उसकी साफ-सफाई और ग्रेडिंग करते हैं।
* इसलिए अखिल भारतीय राष्ट्रीय किसान संघ और तम्बाकू उत्पादक एवं व्यापारी संघ के किसान मित्रों और व्यापारिक मित्रों ने माननीय निर्मला सीतारमण जी, जीएसटी परिषद, राज्य सरकार, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना के अधिकारियों से लेकर राजनेताओं तक अपनी अपिल को प्रस्तुत किया है और उनसे जल्द से जल्द इसका समाधान करने का अनुरोध किया है।

